Saturday, June 27, 2026
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एसजीआरआर स्कूलों को ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ बनाने पर मंथन

एसजीआरआर स्कूल्स: सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस – गुणवत्तापरक समावेशी शिक्षा पर विशेषज्ञों ने किया मंथन प्रधानाचार्यों के वार्षिक अधिवेशन में गुणवत्ता, नवाचार, समावेशी शिक्षा और सतत विकास पर बनी रणनीत बदलते वैश्विक शैक्षिक परिवेश में विद्यालयों को केवल परीक्षा परिणामों तक सीमित न रखकर उन्हें उत्कृष्टता, नवाचार और मानवीय मूल्यों के केन्द्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से आयोजित गुरु राम राय एजुकेशन मिशन के एसजीआरआर पब्लिक स्कूलों के प्रधानाचार्यों के वार्षिक अधिवेशन में शिक्षा के विविध आयामों पर गहन मंथन हुआ। ‘एसजीआरआर स्कूल्स: सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस – गुणवत्तापरक समावेशी शिक्षा एवं सतत विकास’ विषय पर आयोजित अधिवेशन में शिक्षा विशेषज्ञों ने विद्यालयों में अकादमिक उत्कृष्टता, प्रभावी नेतृत्व, नवाचार, संस्थागत विकास तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने की रणनीतियों पर विस्तार से विचार साझा किए।

श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय, पटेल नगर के सभागार में आयोजित अधिवेशन का शुभारम्भ मुख्य अतिथि एसजीआरआर एजुकेशन मिशन के प्रेसीडेंट एस.सी. डोभाल ने दीप प्रज्ज्वलित कर एवं परमपूज्य ब्रह्मलीन श्रीमहंत इन्दिरेश चरण दास जी महाराज के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। अधिवेशन में उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, पंजाब, दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों के एसजीआरआर पब्लिक स्कूलों के 100 से अधिक प्रधानाचार्यों ने सहभागिता की। एसजीआरआर पब्लिक स्कूल, पटेल नगर के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना ने कार्यक्रम को गरिमामय वातावरण प्रदान किया। स्वागत भाषण में अधिकृत हस्ताक्षरी प्रबंधक विजय नौटियाल ने सीबीएसई बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों एवं उनके प्रधानाचार्यों को बधाई देते हुए गुणवत्ता आधारित शिक्षा को मिशन की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।

मुख्य अतिथि एस.सी. डोभाल, प्रेसीडेंट, एसजीआरआर एजुकेशन मिशन ने कहा कि मिशन के चेयरमैन श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज के दूरदर्शी नेतृत्व और कुशल मार्गदर्शन ने एसजीआरआर शिक्षण संस्थानों को उत्कृष्टता की नई पहचान दिलाई है। उन्होंने कहा कि प्रधानाचार्य किसी भी विद्यालय की प्रगति के केन्द्रबिंदु होते हैं। उनका प्रभावी नेतृत्व, प्रशासनिक दक्षता और शैक्षणिक दृष्टिकोण ही विद्यालय को उत्कृष्टता की ओर अग्रसर करता है।

विनय मोहन थपलियाल, एजुकेशन ऑफिसर, एसजीआरआर एजुकेशन मिशन ने ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ की अवधारणा को विस्तार से स्पष्ट करते हुए कहा कि उत्कृष्ट विद्यालय वही है, जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, प्रभावी नेतृत्व, आधुनिक संसाधनों, प्रशिक्षित शिक्षकों, नवाचार और विद्यार्थी-केंद्रित वातावरण के संतुलित समन्वय से निरंतर विकास की दिशा में कार्य करे। उन्होंने विद्यालयों में गुणवत्ता आश्वासन की सुदृढ़ प्रणाली विकसित करने पर बल दिया।

श्रीमती कविता सिंह, प्रधानाचार्या, एसजीआरआर पब्लिक स्कूल, पटेल नगर ने विद्यालयों में अपनाई जा रही श्रेष्ठ कार्य प्रणालियों को साझा करते हुए बताया कि नवाचार आधारित शिक्षण, सतत मूल्यांकन, अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर केन्द्रित प्रयास ही किसी विद्यालय को उत्कृष्ट बनाते हैं।

जी.एस. तोमर, एजुकेशन ऑफिसर, एसजीआरआर एजुकेशन मिशन ने सीबीएसई परीक्षा परिणामों का विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए कहा कि बेहतर परिणाम केवल परीक्षा की तैयारी से नहीं, बल्कि पूरे वर्ष की सुनियोजित शैक्षणिक रणनीति, नियमित मूल्यांकन, विषयवार विश्लेषण तथा विद्यार्थियों के व्यक्तिगत मार्गदर्शन से प्राप्त होते हैं। उन्होंने परिणामों को और अधिक उत्कृष्ट बनाने के लिए कई व्यवहारिक सुझाव भी दिए।

डॉ. आर.पी. सिंह, एजुकेशन ऑफिसर ने ‘हर बच्चा सीख सकता है’ विषय पर प्रेरक व्याख्यान देते हुए कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी में सीखने की क्षमता होती है। आवश्यकता केवल उसकी सीखने की शैली को समझने, सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराने और शिक्षक द्वारा प्रेरणादायी शिक्षण पद्धति अपनाने की है। उन्होंने समावेशी शिक्षा को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।

श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) के. प्रतापन ने प्रधानाचार्यों से संवाद करते हुए कहा कि विद्यालयों को बदलते समय के अनुरूप अनुसंधान आधारित शिक्षा, डिजिटल तकनीक, नवाचार और नैतिक मूल्यों का समन्वय करना होगा। उन्होंने विद्यालयों और विश्वविद्यालयों के बीच अकादमिक सहयोग को और मजबूत बनाने पर बल दिया।

प्रतिभा अत्री, प्रधानाचार्या, एसजीआरआर पब्लिक स्कूल, रेसकोर्स ने कहा कि मूल्य आधारित शिक्षा ही उत्कृष्ट समाज की आधारशिला है। उन्होंने विद्यार्थियों में अनुशासन, संवेदनशीलता, सामाजिक उत्तरदायित्व, नेतृत्व क्षमता और नैतिक चरित्र के विकास को विद्यालयी शिक्षा का मूल उद्देश्य बताया।

नवीन सानयाल, सहायक लेखा अधिकारी, एसजीआरआर एजुकेशन मिशन ने विद्यालयों में वित्तीय पारदर्शिता, प्रभावी लेखा प्रबंधन, ईएसआईसी, ईपीएफ एवं वैधानिक अनुपालन की जानकारी देते हुए कहा कि मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ आधार प्रदान करती है।

अधिवेशन में शिक्षा अधिकारियों एवं विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्यों ने उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों और शहरी विद्यालयों की भौगोलिक परिस्थितियों, स्थानीय चुनौतियों तथा प्रभावी शैक्षणिक मॉडल पर विस्तृत चर्चा की। इसके उपरांत विभिन्न राज्यों के एसजीआरआर विद्यालयों के शिक्षा अधिकारियों एवं लेखा विभाग के प्रतिनिधियों ने शैक्षणिक और प्रशासनिक विषयों पर अलग-अलग तकनीकी सत्रों में विस्तृत विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम का समापन अधिकृत हस्ताक्षरी बीना रावत के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर एसजीआरआर एजुकेशन मिशन से जुड़े अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे

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