निर्वाचन प्रक्रिया और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर महापौर सौरभ थपलियाल ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सवाल उठाना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाने से पहले तथ्यों और आधिकारिक दस्तावेजों को देखना भी उतना ही आवश्यक है।
महापौर ने कहा कि 24 जून 2025 को निर्वाचन आयोग ने बिहार में SIR का आदेश जारी किया था। इसके बाद 27 मई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने बिहार में SIR की वैधता को बरकरार रखा। सर्वोच्च न्यायालय के आधिकारिक सारांश के अनुसार, न्यायालय ने SIR को वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप और वैध उद्देश्य पर आधारित माना।
उन्होंने कहा कि वर्तमान निर्वाचन आयोग में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी हैं। निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट भी इन तीनों को आयोग के वर्तमान पदाधिकारियों के रूप में सूचीबद्ध करती है।
“कांग्रेस आरोप नहीं, तथ्यों के साथ बात करे
महापौर सौरभ थपलियाल ने कहा कि SIR को लेकर कांग्रेस द्वारा लगातार उठाए जा रहे सवालों को अब तथ्यों की कसौटी पर देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि—
“एक संवैधानिक संस्था की प्रक्रिया पर सवाल उठाना अलग बात है और बिना पर्याप्त तथ्य के उस पर लगातार आरोप लगाना अलग बात। सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय सामने है। अब कांग्रेस को जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि उसके आरोप किस तथ्य और किस दस्तावेज पर आधारित हैं।”
महापौर ने कांग्रेस के पांच मुद्दों पर उठाए सवाल
- SIR को लेकर लगाए गए आरोपों पर स्पष्टीकरण दे कांग्रेस
महापौर ने कहा कि SIR का आदेश 24 जून 2025 को जारी हुआ था और सर्वोच्च न्यायालय ने 27 मई 2026 को बिहार SIR की वैधता को बरकरार रखा। ऐसे में कांग्रेस को अपने आरोपों के कानूनी आधार को स्पष्ट करना चाहिए। - प्रशासनिक पत्रों को SIR से जोड़ने पर सवाल
महापौर ने कहा कि किसी अधिकारी के प्रशासनिक पत्र या डेपुटेशन से जुड़े दस्तावेज को SIR की पूरी प्रक्रिया से जोड़कर प्रस्तुत करने से पहले उसके संदर्भ और आधिकारिक रिकॉर्ड को सामने रखना चाहिए। - मीडिया रिपोर्ट और आधिकारिक तथ्य में अंतर समझना होगा
महापौर ने कहा कि किसी मीडिया रिपोर्ट के आधार पर राजनीतिक निष्कर्ष निकालने के बजाय संबंधित दस्तावेज और आधिकारिक पक्ष जनता के सामने रखा जाना चाहिए। - मतदाता सूची से जुड़े फॉर्म और प्रक्रिया पर भ्रम न फैलाएं
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने अथवा संशोधन की प्रक्रिया निर्धारित कानूनी व्यवस्था के तहत होती है। पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करना निर्वाचन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। - BLO और जमीनी चुनावी व्यवस्था पर राजनीति न हो
महापौर ने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया में BLO सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी जमीनी स्तर पर कार्य करते हैं। उनकी जिम्मेदारियों और कार्यप्रणाली को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय बनाने के बजाय तथ्यात्मक शिकायत होने पर निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से उसे उठाया जाना चाहिए।
“सेना और संवैधानिक संस्थाओं पर बयानबाजी में जिम्मेदारी जरूरी”
महापौर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा अतीत में EVM, सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयरस्ट्राइक को लेकर दिए गए बयानों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सेना की कार्रवाई और संवैधानिक संस्थाओं जैसे निर्वाचन आयोग तथा न्यायपालिका से जुड़े विषय अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए राजनीतिक दलों को इन पर सार्वजनिक बयान देते समय तथ्यात्मक जिम्मेदारी बरतनी चाहिए।
महापौर ने कहा—
“राजनीतिक असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते समय आरोपों के साथ तथ्य भी सामने आने चाहिए। जनता अब आरोप नहीं, तथ्य और प्रमाण देखना चाहती है।”
“2027 में जनता सवाल पूछेगी”
महापौर सौरभ थपलियाल ने कहा कि चुनावी राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप होते रहेंगे, लेकिन अंततः जनता के सामने हर राजनीतिक दल को अपने बयानों और दावों का जवाब देना पड़ता है।
उन्होंने कहा—
“चुनाव आयोग की प्रक्रिया और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद कांग्रेस को अपने लगाए गए आरोपों पर जनता के सामने स्पष्ट जवाब देना चाहिए। लोकतंत्र में जनता सर्वोच्च है और 2027 में जनता ही तय करेगी कि कौन तथ्य के साथ खड़ा रहा और कौन केवल आरोपों की राजनीति करता रहा
