उत्तराखंड में बिना पंजीकरण चल रहे मदरसों को लेकर प्रमुखता से रिपोर्ट प्रकाशित की थी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी इसका संज्ञान लेते हुए प्रमुख सचिव को कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
उत्तराखंड में बिना पंजीकरण चल रहे मदरसों की की जांच होगी। मंगलवार को प्रमुख सचिव एल. फैनई ने सभी डीएम को जिला स्तर पर जांच समितियों के गठन का आदेश दिया। जिलों से दस दिन में जांच रिपोर्ट मांगी गई है।
आपके अपने अखबार ‘हिन्दुस्तान’ ने 19 दिसंबर के अंक में उत्तराखंड में बिना पंजीकरण चल रहे मदरसों को लेकर प्रमुखता से रिपोर्ट प्रकाशित की थी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी इसका संज्ञान लेते हुए प्रमुख सचिव को कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
मालूम हो कि राज्य में वर्तमान में केवल 415 मदरसे पंजीकृत हैं। इनमें करीब 46 हजार छात्र पढ़ाई करते हैं। जबकि बिना रजिस्ट्रेशन के भी बड़ी संख्या में मदरसों का संचालन हो रहा है। ‘हिन्दुस्तान’ में रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने इसे बेहद गंभीरता से लिया।
दरअसल, पंजीकृत मदरसों को सरकार कई सुविधाएं मुहैया कराती है। जबकि अवैध मदरसों में छात्रों को सुविधाएं नहीं मिलतीं। साथ ही उनकी गतिविधियां भी सवालों के घेरे में रहती हैं।
इन बिंदुओं पर होगी जांच
मदरसों का पंजीकरण नहीं कराने के कारण, फंडिंग, बच्चों के परिजनों की सहमति, सत्यापन आदि की जांच की जाएगी। उधर, मदरसा बोर्ड के पास अवैध मदरसों का डाटा नहीं है। मदरसा बोर्ड में 60 से ज्यादा नए मदरसों की फाइलें कई सालों से मान्यता के लिए लंबित है। हाल ही में हुई बोर्ड बैठक में मान्यता कमेटी का गठन किया गया है। अध्यक्ष मुफ्ती शमून कासमी के अनुसार सरकार का मकसद मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों को मुख्यधारा से जोड़ना है। मुख्यमंत्री पुष्कर धामी की अगुवाई में सरकार लगातार प्रयास कर रही है।