Sunday, March 15, 2026
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ग्राफिक एरा हिल विश्वविद्यालय, भीमताल में गुरु-दक्षता फैकल्टी इंडक्शन प्रोग्राम का शुभारंभ

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भीमताल, 5 मई 2025 — ग्राफिक एरा हिल विश्वविद्यालय, भीमताल में गुरु-दक्षता फैकल्टी इंडक्शन प्रोग्राम (एफ.आई.पी.) का भव्य शुभारंभ हुआ। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एम.एम.-टी.टी.सी.) तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खड़गपुर के सहयोग से 5 मई से 31 मई 2025 तक आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य नव नियुक्त शिक्षकों को प्रभावी शिक्षण कौशल, व्यावसायिक मूल्यों एवं संस्थागत समझ से सशक्त बनाना है।

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन से हुई, जो अज्ञान से ज्ञान की ओर अग्रसर होने का प्रतीक है। इस अवसर पर “तमसो मा ज्योतिर्गमय” मंत्र का उच्चारण किया गया, जो इस कार्यक्रम की मूल भावना को अभिव्यक्त करता है — ज्ञान के माध्यम से अंधकार से प्रकाश की ओर।

डॉ. संजीव कुमार, प्रोफेसर, सिविल इंजीनियरिंग विभाग, ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय, देहरादून ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने शिक्षकों के सर्वांगीण विकास की आवश्यकता पर बल देते हुए सतत अधिगम को शैक्षणिक सफलता की कुंजी बताया।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खड़गपुर से डॉ. श्यामल कुमार दास मंडल (अध्यक्ष, शिक्षण अधिगम एवं वर्चुअल स्किलिंग केंद्र) एवं डॉ. कौशल कुमार भगत (उपाध्यक्ष, शिक्षण अधिगम एवं वर्चुअल स्किलिंग केंद्र) ने ऑनलाइन माध्यम से सहभागिता की। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के व्यावहारिक क्रियान्वयन में इस कार्यक्रम की महत्ता को रेखांकित किया तथा प्रतिभागियों को खुले मन और सीखने की भावना के साथ इस कार्यक्रम से लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रत्यायन प्रक्रिया में भी अहम भूमिका निभाता है।

भीमताल परिसर के निदेशक ने अपने संबोधन में शिक्षकों को इस कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी हेतु प्रेरित किया। उन्होंने अकादमिक उत्तरदायित्वों के साथ-साथ व्यावसायिक विकास के संतुलन को आवश्यक बताया। प्रथम रिसोर्स पर्सन के रूप में उन्होंने “उच्च शिक्षण संस्थानों में संकाय की भूमिका” विषय पर दो महत्वपूर्ण सत्र लिए। उन्होंने कौशल-आधारित पाठ्यक्रम की आवश्यकता, रटने की प्रणाली से दक्षता आधारित मूल्यांकन की ओर बदलाव, तथा नवीन शिक्षण विधियों पर बल दिया। साथ ही, उन्होंने डिजिटल पोर्टलों के माध्यम से निरंतर आत्म-विकास की महत्ता को भी उजागर किया। उन्होंने शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत मिली स्वायत्तता का विवेकपूर्ण प्रयोग कर विद्यार्थियों को सशक्त बनाने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आग्रह किया।

कार्यक्रम का औपचारिक समापन धन्यवाद ज्ञापन तथा राष्ट्रगान के साथ हुआ।

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