Monday, March 9, 2026
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हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग की पुनर्विचार याचिका की खारिज

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने दो प्रादेशिक क्षेत्रों की मतदाता सूची में एक ही व्यक्ति का नाम दर्ज होने से संबंधित मामले में राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि दिनांक 6 जुलाई 2025 को पारित स्थगन आदेश अभी भी प्रभावी है और इसे निरस्त नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह आदेश उत्तराखंड पंचायती राज अधिनियम, 2016 की धारा 9 की उपधारा (6) और (7) के उल्लंघन के आधार पर पारित किया गया था, इसलिए इसे बदलना न्यायसंगत नहीं होगा।

खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि 11 जुलाई 2025 को पारित आदेश में चुनाव प्रक्रिया पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। न्यायालय ने कहा कि चुनाव संपन्न कराना राज्य निर्वाचन आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है और आयोग को उसका पालन करना होगा।

साथ ही, न्यायालय ने यह चेतावनी भी दी कि यदि कोई व्यक्ति स्थगन आदेश का उल्लंघन करता है, तो वह अवमानना की श्रेणी में आएगा और ऐसे मामलों में कड़ी विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।

यह आदेश समाजसेवी शक्ति सिंह बर्त्वाल द्वारा दाखिल याचिका पर पारित किया गया। याचिका पर सोमवार को मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ में दो चरणों में सुनवाई हुई। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि वह अपने 11 जुलाई 2025 के आदेश में कोई परिवर्तन नहीं करेगी।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अभीजय सिंह नेगी ने सुनवाई के दौरान प्रश्न उठाया कि देश में किसी भी राज्य में एक व्यक्ति का नाम दो अलग-अलग निकायों की मतदाता सूची में दर्ज होना आपराधिक श्रेणी में आता है। ऐसे में उत्तराखंड राज्य निर्वाचन आयोग ने किस आधार पर ऐसे लोगों को चुनाव में भाग लेने की अनुमति दी है, यह गंभीर विषय है।

न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति को इस मामले में आपत्ति है, तो वह पृथक रूप से अवमानना याचिका दायर कर सकता है।

याचिकाकर्ता शक्ति सिंह बर्त्वाल ने बताया कि कई व्यक्ति नगर निकाय और पंचायत क्षेत्र—दोनों की मतदाता सूचियों में दर्ज हैं और पंचायत चुनाव में प्रतिभाग भी कर रहे हैं। इस गंभीर विसंगति को लेकर उन्होंने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। उच्च न्यायालय द्वारा स्थगन आदेश को बरकरार रखा है, ऐसे में बर्त्वाल ने निर्वाचन आयोग से अपेक्षित कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।

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